मोहतरमा ने क्या खूब फरमाया, रहे उसी मुल्क मे जो अपने मुल्क के न हुए वो पाकिस्तान के क्या होगे,
देश के गद्दारों अब कहा बसोगे, खुद को धोभी का कुत्ता ही कहोगे।
अखंड एकता के नारे लगाते लगाते अब जातिवाद से सत्ता को सजाने लगे है।
आरक्षण के नाम पर देश के जिम्मेदार बस अपनी सरकार का अस्तित्व बचाने लगे है।
कभी हारे नहीं हम युद्धों में डरते है छल छंदों से ,
हर बार पराजय पाई है अपने ही घर के जयचंदो से।
सर्जिकल के सबूत मांगे तो कभी एयर स्ट्राइक के निशान,
जागरूकता के अधिकारों की थी इन्हे बखूबी पहचान।
तो फिर क्यों खुद को तुमने बेचारा बताया जब सरकार ने देश में रहने का एक पत्र मंगवाया।
कहीं चोर की दाढ़ी में तिनका तो नहीं, गद्दारी का राज खुलने की चिंता तो नहीं।
पत्र की वैधता - अवैधता सरकार का फैसला है लेकिन तुमको तो प्रूव करने में ही मसला है।
बेटियां तुमसे सुरक्षित हो नहीं रही वजूद पर शक होना लाज़मी है।
अगर सच्चे देशवासी हो तो #NRC समर्थन में क्यों कमी है।
संसद में बैठी दीदी दलित आरक्षण का नारा लगती है,तो
कुछ जय परशुराम कहकर ब्राह्मणों के हृदय में बैठ जाते है।
संविधान में लिखे "समानता के अधिकार"की धारा को कैसे ये जिम्मेदार राजनेता भूल जाते है।
खुद को भारतीय कहकर चोरी से पड़ोसी मुल्क का समर्थन करते है।
मेरे देश में कुछ ऐसे महान राजनीतिज्ञ सत्ताप्रेमी भी बसते है।
भगत सिंह होते तो बड़ा पछतावा करते बेकार ही गई उनकी जवानी और फांसी के वो तख्ते।
राजनेता अपने घर भरने लगे है और युवा की तो बस ये कहानी है राज सिमरन का और सिमरन राज की दीवानी है।
ज़्यादा कुछ कहे तो कम नहीं होगा युवा पीढ़ी की अंधता देखते हुए लगता है देश की बरबादी का इनको कोई ग़म नहीं होगा।
कभी देशभक्ति तो कभी अंधी जागरूकता के नाम पर प्रोटेस्ट करते है सोशल मीडिया के लिए।
बाकी सब जाए भाड़ में इन्होंने तो वह भी सुट्टे ही पिए।
कलम के क्षत्रिय भी आजकल हास्य रस उत्पन्न कर जीविका चला रहे है।
कौन फसे इस गंदी राजनीति में सब अपना आंचल छुपा रहे है।
जरा इतिहास उठा के देखिए कलम के हुनारबाजो ने क्या तहलका मचाया है।
कुंठित युवा पीढ़ी से तो हास्य रास को ही तवज्जों मिलते पाया है।
भगवा और हरे रंग का भेद खत्म हो जाए काश कोई कलम कागज को कुछ इस तरह भी रौंद पाए।
शांति का वो सफेद रंग सिर्फ तिरंगे में ही नहीं मेरे देश में भी देखा जाए।
कभी हारे नहीं हम युद्धों से डरते है छल छंदों से,
हर बार पराजय पाई है हमने अपने ही घर के जयचंदो से।
hrr chij ka ek na ek vkt hota h...thoda wait krte h kabhi to sudhrega ye desh....kabhi to rajneta logo ko bhi srm aayegi
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