मै तो नारी थी पर अब खिलौने वाली गुड़िया कहलाऊं।
बयां कर सकूं अपना दर्द ऐसी जुबान कहां से लाऊं।
हर महीने बहा कर रक्त अपना तुझे बाप बनाऊ।
फिर तेरे ही अंश से ना जाने कितनी लाज निर्लज्ज करवाऊं।
दामन पर मेरे कीचड़ उछालने वाले तू भी वही से आया है जहां से मै आई।
फिर तेरा हर गुनाह बहादुरी और मेरी तो आवाज पर भी सबने उंगली उठाई।
लिख सकूं इस दोगले समाज की असलियत वो शब्द कहा से लाऊं।
मै तो नारी थी पर अब खिलोने वाली गुड़िया कहलाऊं।
बस मा बापू के कुछ सपने ही तो पूरे करना चाहती थी।
इसमें मेरी क्या गलती है अगर तेरी आंखो को मै भाती थी।
जानवरों की डॉक्टर होकर भी तेरे अंदर के जानवर को नहीं पहचान पाई।
उड़ान भरने से पहले ही मेरे पंखों में तूने आग लगाई।
मेरी छोटी स्कर्ट और टाइट जींस पर तो सबको बड़ी शर्म आती थी।
देर रात बाहर जाने से रोकना और भी ना जाने कितनी पाबन्दियां मुझ पे लगाई जाती थी।
जरा सी पाबंदी अपने लडलो पर लगाई होती,
ना जाने कितनी मासूम अपनी मा की गोद में ना रोती।
मेरे दर्द को समझ पाना तेरे बस में नहीं तू बस उस दिन का इंतजार कर जब कोई खेले तेरे जिस्म से किसी रास्ते पर और फेक दे तुझे कचरे में कहीं।
यकीनन तेरी मा का आंचल भी शर्मिंदा हुआ होगा
मन में बसे लाडले के चित्र में उसे आज हवस का दरिंदा नजर आया होगा।
पर मेरा बेटा बेकसूर है उस मा ने सबको यही समझाया होगा।
अब अपने आंसू छुपा सकू वो नयन कहा से लाऊं । मै तो मन ही मन अपने ही अस्तित्व से जी चुराऊं।
पापा की परी के पंखों को जलाया है, मेरे पापा को तूने आज बहुत रुलाया है।
चली गई हूं ये सोच के तूने तो मुझे मार दिया लेकिन वापस आऊगी तुझे रुलाने ये मैने प्रण लिया।
right....essi leye kisi ladki ko khamos nhi hona chaia..unko bhi ladko jesa treat krna chaia...jitni pabndi ldkiyo pr hoti h..utni hi pabndi ladko pr bhi lgani chaia..
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