Monday, 16 September 2019

अनजान किताब

इक  रोज़ मिली वो अनजान सी किताब जो खुल कर भी ना खुली थी।
हिसाब था उसमे सब की अच्छाई और बुराइयों का लेकिन पढ़ कर भी ना पढ़ी थी ।
जब खुलने लगी तो लगा सिर्फ कुछ राज है।
जब पढ़ा तो लगा एक एहसास है।
और जब महसूस किया तो समझा एक अलग सा जज्बात है।
हर इक पन्ने पर लिखा था कुछ ऐसा कहने लायक  कुछ नहीं फिर भी बहुत कुछ समझ लिया हो जैसा ।
आसान इतनी थी कि मानो सब कुछ पता हो , समझना और  समझाना किसी ओर ही भाषा में हुआ हो।
ये factul किताबों के बीच मिली एक  actual किताब है।
अपनेपन और reality का अलग ही अंदाज है।
समझ नहीं आता पढ़ने के शौक ने इस किताब को समझाया या इस किताब ने पढ़ने के शौक को जगाया।
बस अब मुस्कुराहट के  highlighter से हर पन्ने की उस लाइन को  highlight करना है जो
पढ़ते हुए  चेहरे पर सलवट लाए।
काश इस अनजान सी किताब का हर पन्ना यु ही खुलता जाए।☺️☺️

4 comments:

  1. पूनमाराम चौधरी17 September 2019 at 07:23

    बहुत ही शानदार तरीके से अल्फाजों को सजाया हैं.समकालीन हिंदी कविता की शिरमौर रचनाओं में शामिल करने योग्य.जज्बातों को भावों में पिरोकर शब्द शिल्प की यह रचना अगर पुस्तक का आकार लें तो साहित्यप्रेमियों के लिए अनमोल सौगात होगी.सुंदर रचना...

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    1. आप जैसे महान साहित्य प्रेमियों की कृपा रही तो 🙏🙏🙏🙏

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